Sunday, 27 September 2009

वो मुझसे खेलेगा..

वो मुझसे खेलेगा, नाकाम करके छोड़ेगा॥

नया खिलौना कोई फिर से हाथ ले लेगा॥


अभी यक़ीं न होगा बाद मेरे दुनिया में

तेरा ठिकाना कोई मेरे घर से पूछेगा॥


कोई अफ़सानानिगारी नहीं कसम ले लो

मैं बुत बना हूं कि वो शख़्स मुझे छू लेगा॥


नहीं वो ग़म की तासीर से वाकिफ़ बेशक़

कैसे मुमकिन है कोई ज़ार-ज़ार रो लेगा॥


मैंने ये सोच के दस्तक ही नहीं दी दर पे

मेरी गली की तरफ़ खिड़कियां वो खोलेगा॥

9 comments:

  1. मैंने ये सोच के दस्तक ही नहीं दी दर पे

    मेरी गली की तरफ़ खिड़कियां वो खोलेगा॥
    बहुत सुन्दर शुभकामनायें

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  2. bahut achi gazal liklhi hai apne...
    acha laga blog pe akar

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  3. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.........
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं....

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  4. आपका स्वागत है
    आपको पढ़कर अच्छा लगा
    शुभकामनाएं


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  5. बहुत ... बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
    हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
    टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
    कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें .(हटाने के लिये देखे http://www.manojsoni.co.nr )
    कृपया मेरे भी ब्लागस देखे और टिप्पणी दे
    http://www.manojsoni.co.nr और http://www.lifeplan.co.nr

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  6. Duniyadari nibha to saktey theey
    Dil hi seeney mein doosra na hua
    sari duniya ki munsafi kar li
    ek apna hi faisla na hua---
    VIDYA RATTAN AASI OF JAMMU

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