Monday, 28 September 2009

मेरी पुरनम कहानियां

मेरी पुरनम कहानियां सुनकर।।
दिल की डूबें न कश्तियां सुनकर।।

तेरे चर्चे में फूलों की खुशबू
पास आती हैं तितलियां सुनकर।।

दूल्हा बाज़ार से ख़रीदेंगे
क्या कहेंगी ये बेटियां सुनकर।।

वह मुझे याद कर रही होगी
लोग टोकेंगे हिचकियां सुनकर।।

सच भी उसको लगे बहाने सा
ख़त्म होंगी न दूरियां सुनकर।।

3 comments:

  1. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, लेखन कार्य के लिए बधाई
    यहाँ भी आयें आपके कदमो की आहट इंतजार हैं,
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  2. बहुत सुन्दर गजले है आपकी फ़िर आउन्गा कभी पढने के लिए बडा अच्छा लगा आपके ब्लाग पर आके, आपको फ़िर से एक बार बधाई

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  3. gud one again

    सच भी उसको लगे बहाने सा
    ख़त्म होंगी न दूरियां सुनकर।।


    hota hai aisa hi aksar

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